ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 117117.3श्रीरामचरितमानस 117.3औरउ ग्यान भगति कर भेद सुनहु सुप्रबीन। जो सुनि होइ राम पद प्रीति सदा अबिछीन ॥116(ख)॥पिछलापूरा अध्याय