ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 115115.2श्रीरामचरितमानस 115.2ताते यह तन मोहि प्रिय भयउ राम पद नेह। निज प्रभु दरसन पायउँ गए सकल संदेह ॥114(क)॥पिछलाअगलापूरा अध्याय