ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 114114.3श्रीरामचरितमानस 114.3जेंहिं आश्रम तुम्ह बसब पुनि सुमिरत श्रीभगवंत। ब्यापिहि तहँ न अबिद्या जोजन एक प्रजंत ॥113(ख)॥पिछलापूरा अध्याय