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श्रीरामचरितमानस 11.2

तब मुनि कहेउ सुमंत्र सन सुनत चलेउ हरषाइ।
रथ अनेक बहु बाजि गज तुरत सँवारे जाइ ॥10(क)॥

पूरा अध्याय