ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 108108.2श्रीरामचरितमानस 108.2हाहाकार कीन्ह गुर दारुन सुनि सिव साप।। कंपित मोहि बिलोकि अति उर उपजा परिताप ॥107(क)॥पिछलाअगलापूरा अध्याय