ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 107107.2श्रीरामचरितमानस 107.2एक बार हर मंदिर जपत रहेउँ सिव नाम। गुर आयउ अभिमान तें उठि नहिं कीन्ह प्रनाम ॥106(क)॥पिछलाअगलापूरा अध्याय