ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 106106.3श्रीरामचरितमानस 106.3गुर नित मोहि प्रबोध दुखित देखि आचरन मम। मोहि उपजइ अति क्रोध दंभिहि नीति कि भावई ॥105(ख)॥पिछलापूरा अध्याय