ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 105105.3श्रीरामचरितमानस 105.3तेहि कलिकाल बरष बहु बसेउँ अवध बिहगेस। परेउ दुकाल बिपति बस तब मैं गयउँ बिदेस ॥104(ख)॥पिछलापूरा अध्याय