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श्रीरामचरितमानस 102.2

सुनु खगेस कलि कपट हठ दंभ द्वेष पाषंड।
मान मोह मारादि मद ब्यापि रहे ब्रह्मंड ॥101(क)॥

पूरा अध्याय