ग्रंथश्रीरामचरितमानसलङ्काकाण्डदोहा 8484.3श्रीरामचरितमानस 84.3देखि पवनसुत धायउ बोलत बचन कठोर। आवत कपिहि हन्यो तेहिं मुष्टि प्रहार प्रघोर ॥83॥पिछलापूरा अध्याय