ग्रंथश्रीरामचरितमानसलङ्काकाण्डदोहा 8181.4श्रीरामचरितमानस 81.4उत पचार दसकंधर इत अंगद हनुमान। लरत निसाचर भालु कपि करि निज निज प्रभु आन ॥80(ग)॥पिछलापूरा अध्याय