ग्रंथश्रीरामचरितमानसलङ्काकाण्डदोहा 8181.2श्रीरामचरितमानस 81.2महा अजय संसार रिपु जीति सकइ सो बीर। जाकें अस रथ होइ दृढ़ सुनहु सखा मतिधीर ॥80(क)॥पिछलाअगलापूरा अध्याय