ग्रंथश्रीरामचरितमानसलङ्काकाण्डदोहा 8080.3श्रीरामचरितमानस 80.3दुहु दिसि जय जयकार करि निज निज जोरी जानि। भिरे बीर इत रामहि उत रावनहि बखानि ॥79॥पिछलापूरा अध्याय