ग्रंथश्रीरामचरितमानसलङ्काकाण्डदोहा 7979.3श्रीरामचरितमानस 79.3ताहि कि संपति सगुन सुभ सपनेहुँ मन बिश्राम। भूत द्रोह रत मोहबस राम बिमुख रति काम ॥78॥पिछलापूरा अध्याय