ग्रंथश्रीरामचरितमानसलङ्काकाण्डदोहा 6767.2श्रीरामचरितमानस 67.2जय जय जय रघुबंस मनि धाए कपि दै हूह। एकहि बार तासु पर छाड़ेन्हि गिरि तरु जूह ॥66॥पिछलापूरा अध्याय