ग्रंथश्रीरामचरितमानसलङ्काकाण्डदोहा 6262.2श्रीरामचरितमानस 62.2प्रभु प्रलाप सुनि कान बिकल भए बानर निकर। आइ गयउ हनुमान जिमि करुना महँ बीर रस ॥61॥पिछलापूरा अध्याय