ग्रंथश्रीरामचरितमानसलङ्काकाण्डदोहा 5656.2श्रीरामचरितमानस 56.2राम पदारबिंद सिर नायउ आइ सुषेन। कहा नाम गिरि औषधी जाहु पवनसुत लेन ॥55॥पिछलापूरा अध्याय