ग्रंथश्रीरामचरितमानसलङ्काकाण्डदोहा 55.2श्रीरामचरितमानस 5.2सेतुबंध भइ भीर अति कपि नभ पंथ उड़ाहिं। अपर जलचरन्हि ऊपर चढ़ि चढ़ि पारहि जाहिं ॥4॥पिछलापूरा अध्याय