ग्रंथश्रीरामचरितमानसलङ्काकाण्डदोहा 44.2श्रीरामचरितमानस 4.2श्री रघुबीर प्रताप ते सिंधु तरे पाषान। ते मतिमंद जे राम तजि भजहिं जाइ प्रभु आन ॥3॥पिछलापूरा अध्याय