ग्रंथश्रीरामचरितमानसलङ्काकाण्डदोहा 3636.3श्रीरामचरितमानस 36.3साँझ जानि दसकंधर भवन गयउ बिलखाइ। मंदोदरी रावनहि बहुरि कहा समुझाइ।।(ख)।।पिछलापूरा अध्याय