ग्रंथश्रीरामचरितमानसलङ्काकाण्डदोहा 3535.3श्रीरामचरितमानस 35.3भूमि न छाँडत कपि चरन देखत रिपु मद भाग।। कोटि बिघ्न ते संत कर मन जिमि नीति न त्याग ॥34(ख)॥पिछलापूरा अध्याय