ग्रंथश्रीरामचरितमानसलङ्काकाण्डदोहा 1717.3श्रीरामचरितमानस 17.3फूलह फरइ न बेत जदपि सुधा बरषहिं जलद। मूरुख हृदयँ न चेत जौं गुर मिलहिं बिरंचि सम ॥16(ख)॥पिछलापूरा अध्याय