ग्रंथश्रीरामचरितमानसलङ्काकाण्डदोहा 119119.4श्रीरामचरितमानस 119.4कहि न सकहिं कछु प्रेम बस भरि भरि लोचन बारि। सन्मुख चितवहिं राम तन नयन निमेष निवारि ॥118(ग)॥पिछलापूरा अध्याय