ग्रंथश्रीरामचरितमानसलङ्काकाण्डदोहा 118118.3श्रीरामचरितमानस 118.3उमा जोग जप दान तप नाना मख ब्रत नेम। राम कृपा नहि करहिं तसि जसि निष्केवल प्रेम ॥117(ख)॥पिछलापूरा अध्याय