ग्रंथश्रीरामचरितमानसलङ्काकाण्डदोहा 114114.5श्रीरामचरितमानस 114.5परद्रोह रत अति दुष्ट। पायो सो फलु पापिष्ट।। अब सुनहु दीन दयाल। राजीव नयन बिसाल ॥5॥पिछलाअगलापूरा अध्याय