ग्रंथश्रीरामचरितमानसलङ्काकाण्डदोहा 108108.3श्रीरामचरितमानस 108.3सुनु सुत सदगुन सकल तव हृदयँ बसहुँ हनुमंत। सानुकूल कोसलपति रहहुँ समेत अनंत ॥107॥पिछलापूरा अध्याय