ग्रंथश्रीरामचरितमानसलङ्काकाण्डदोहा 104104.3श्रीरामचरितमानस 104.3कृपादृष्टि करि प्रभु अभय किए सुर बृंद। भालु कीस सब हरषे जय सुख धाम मुकंद ॥103॥पिछलापूरा अध्याय