ग्रंथश्रीरामचरितमानसलङ्काकाण्डदोहा 102102.7श्रीरामचरितमानस 102.7प्रगटेसि बिपुल हनुमान। धाए गहे पाषान।। तिन्ह रामु घेरे जाइ। चहुँ दिसि बरूथ बनाइ ॥7॥पिछलाअगलापूरा अध्याय