ग्रंथश्रीरामचरितमानसलङ्काकाण्डदोहा 102102.3श्रीरामचरितमानस 102.3धरु मारु बोलहिं घोर। रहि पूरि धुनि चहुँ ओर।। मुख बाइ धावहिं खान। तब लगे कीस परान ॥3॥पिछलाअगलापूरा अध्याय