ग्रंथश्रीरामचरितमानसलङ्काकाण्डदोहा 100100.3श्रीरामचरितमानस 100.3काटत सिर होइहि बिकल छुटि जाइहि तव ध्यान। तब रावनहि हृदय महुँ मरिहहिं रामु सुजान ॥99॥पिछलापूरा अध्याय