ग्रंथश्रीरामचरितमानससुन्दरकाण्डदोहा 5858.2श्रीरामचरितमानस 58.2काटेहिं पइ कदरी फरइ कोटि जतन कोउ सींच। बिनय न मान खगेस सुनु डाटेहिं पइ नव नीच ॥58॥पिछलापूरा अध्याय