ग्रंथश्रीरामचरितमानससुन्दरकाण्डदोहा 4848.2श्रीरामचरितमानस 48.2सगुन उपासक परहित निरत नीति दृढ़ नेम। ते नर प्रान समान मम जिन्ह कें द्विज पद प्रेम ॥48॥पिछलापूरा अध्याय