ग्रंथश्रीरामचरितमानससुन्दरकाण्डदोहा 4242.2श्रीरामचरितमानस 42.2जिन्ह पायन्ह के पादुकन्हि भरतु रहे मन लाइ। ते पद आजु बिलोकिहउँ इन्ह नयनन्हि अब जाइ ॥42॥पिछलापूरा अध्याय