ग्रंथश्रीरामचरितमानससुन्दरकाण्डदोहा 3636.2श्रीरामचरितमानस 36.2-राम बान अहि गन सरिस निकर निसाचर भेक। जब लगि ग्रसत न तब लगि जतनु करहु तजि टेक ॥36॥पिछलापूरा अध्याय