ग्रंथश्रीरामचरितमानससुन्दरकाण्डदोहा 3232.2श्रीरामचरितमानस 32.2सुनि प्रभु बचन बिलोकि मुख गात हरषि हनुमंत। चरन परेउ प्रेमाकुल त्राहि त्राहि भगवंत ॥32॥पिछलापूरा अध्याय