ग्रंथश्रीरामचरितमानससुन्दरकाण्डदोहा 2222.2श्रीरामचरितमानस 22.2प्रनतपाल रघुनायक करुना सिंधु खरारि। गएँ सरन प्रभु राखिहैं तव अपराध बिसारि ॥22॥पिछलापूरा अध्याय