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श्रीरामचरितमानस 18.2

कछु मारेसि कछु मर्देसि कछु मिलएसि धरि धूरि।
कछु पुनि जाइ पुकारे प्रभु मर्कट बल भूरि ॥18॥

पूरा अध्याय