ग्रंथश्रीरामचरितमानससुन्दरकाण्डदोहा 1515.2श्रीरामचरितमानस 15.2निसिचर निकर पतंग सम रघुपति बान कृसानु। जननी हृदयँ धीर धरु जरे निसाचर जानु ॥15॥पिछलापूरा अध्याय