ग्रंथश्रीरामचरितमानससुन्दरकाण्डदोहा 1414.2श्रीरामचरितमानस 14.2रघुपति कर संदेसु अब सुनु जननी धरि धीर। अस कहि कपि गद गद भयउ भरे बिलोचन नीर ॥14॥पिछलापूरा अध्याय