ग्रंथश्रीरामचरितमानससुन्दरकाण्डदोहा 1212.2श्रीरामचरितमानस 12.2कपि करि हृदयँ बिचार दीन्हि मुद्रिका डारी तब। जनु असोक अंगार दीन्हि हरषि उठि कर गहेउ ॥12॥पिछलापूरा अध्याय