ग्रंथश्रीरामचरितमानससुन्दरकाण्डदोहा 11.5श्रीरामचरितमानस 1.5हनूमान तेहि परसा कर पुनि कीन्ह प्रनाम। राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहाँ बिश्राम ॥1॥पिछलापूरा अध्याय