ग्रंथश्रीरामचरितमानसकिष्किन्धाकाण्डदोहा 55.2श्रीरामचरितमानस 5.2तब हनुमंत उभय दिसि की सब कथा सुनाइ।। पावक साखी देइ करि जोरी प्रीती दृढ़ाइ ॥4॥पिछलापूरा अध्याय