ग्रंथश्रीरामचरितमानसकिष्किन्धाकाण्डदोहा 2828.2श्रीरामचरितमानस 28.2मोहि लै जाहु सिंधुतट देउँ तिलांजलि ताहि । बचन सहाइ करवि मैं पैहहु खोजहु जाहि ॥27॥पिछलापूरा अध्याय