ग्रंथश्रीरामचरितमानसकिष्किन्धाकाण्डदोहा 1717.2श्रीरामचरितमानस 17.2चले हरषि तजि नगर नृप तापस बनिक भिखारि। जिमि हरिभगत पाइ श्रम तजहि आश्रमी चारि ॥16॥पिछलापूरा अध्याय