श्रीरामचरितमानस 7.2
तन पुलक निर्भर प्रेम पुरन नयन मुख पंकज दिए।
मन ग्यान गुन गोतीत प्रभु मैं दीख जप तप का किए।।
जप जोग धर्म समूह तें नर भगति अनुपम पावई।
रधुबीर चरित पुनीत निसि दिन दास तुलसी गावई।।
तन पुलक निर्भर प्रेम पुरन नयन मुख पंकज दिए।
मन ग्यान गुन गोतीत प्रभु मैं दीख जप तप का किए।।
जप जोग धर्म समूह तें नर भगति अनुपम पावई।
रधुबीर चरित पुनीत निसि दिन दास तुलसी गावई।।