ग्रंथश्रीरामचरितमानसअरण्यकाण्डदोहा 3333.1श्रीरामचरितमानस 33.1गीध देह तजि धरि हरि रुपा। भूषन बहु पट पीत अनूपा।। स्याम गात बिसाल भुज चारी। अस्तुति करत नयन भरि बारी।।अगलापूरा अध्याय