ग्रंथश्रीरामचरितमानसअरण्यकाण्डदोहा 3030.2श्रीरामचरितमानस 30.2हारि परा खल बहु बिधि भय अरु प्रीति देखाइ। तब असोक पादप तर राखिसि जतन कराइ ॥29(क)॥पिछलाअगलापूरा अध्याय