ग्रंथश्रीरामचरितमानसअरण्यकाण्डदोहा 2727.3श्रीरामचरितमानस 27.3मम पाछें धर धावत धरें सरासन बान। फिरि फिरि प्रभुहि बिलोकिहउँ धन्य न मो सम आन ॥26॥पिछलापूरा अध्याय