ग्रंथश्रीरामचरितमानसअरण्यकाण्डदोहा 2525.2श्रीरामचरितमानस 25.2करि पूजा मारीच तब सादर पूछी बात। कवन हेतु मन ब्यग्र अति अकसर आयहु तात ॥24॥पिछलापूरा अध्याय