ग्रंथश्रीरामचरितमानसअरण्यकाण्डदोहा 11.3श्रीरामचरितमानस 1.3उमा राम गुन गूढ़ पंडित मुनि पावहिं बिरति। पावहिं मोह बिमूढ़ जे हरि बिमुख न धर्म रति।।पिछलापूरा अध्याय